
देहरादून: देहरादून में बैठकर अमेरिका व कनाडा के नागरिकों से ठगी करने वाले गिरोह का राजपुर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अवैध रूप से चल रहे काल सेंटर में दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने अपने नाम अंग्रेजी में रखे हुए थे और मोबाइल व लैपटाप में एंटीवायरस एप को बेचने के नाम पर विदेशी नागरिकों से ठगी कर रहे थे। वह 100 डालर का गिफ्ट कार्ड लेकर कुछ ही विदेशी नागरिकों को एप उपलब्ध कराते थे और गिफ्ट कार्ड को चाइनीज नागरिकों को बेच देते थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि राजपुर क्षेत्र में अवैध काल सेंटर से विदेशी नागरिकों को ठगने की सूचना मिली थी। राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट को गहनता से जांच कर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। सोमवार देर रात थानाध्यक्ष पीडी भट्ट के नेतृत्व में विभिन्न तीन टीमों ने आर्चिड पार्क, तरला नागल रोड पर अवैध काल सेंटर पर दबिश दी। इस दौरान काल सेंटर में काम कर रहे कुछ युवक पुलिस टीम को देखकर मौके से फरार हो गए।
पुलिस टीम ने मौके से काल सेंटर संचालित कर रहे गिरोह के सरगना आशीष निवासी मोरिवाड़ा सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश, सहित शाहखाकी चौक सिटी मेरठ उत्तर प्रदेश निवासी अक्षत शर्मा, अनूपनगर फाजलपुर मेरठ उतर प्रदेश निवासी अंशु मुद्गल, सिलवारा रोड सिविल लाइन जिला सुलतानपुर उत्तर प्रदेश निवासी राज सिंह और शास्त्री नगर जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश निवासी अभिनव सिंह को गिरफ्तार किया। उनके पास से 14 मोबाइल फोन, चार लैपटाप, एक आईपैड व ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अन्य उपकरण बरामद हुए।
जांच के दौरान पता चला कि काल सेंटर के माध्यम से आरोपी विदेशी ग्राहकों को उनके फोन व लैपटाप में एंटीवायरस डालने के नाम से धोखाधड़ी करते थे। सरगना आशीष ने बताया गया कि वह पहले नोएडा स्थित एक काल सेंटर में काम करता था, जहां वह विदेशी नागरिको को काल कर इसी प्रकार धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम देता था। तीन माह पूर्व वह नौकरी को छोड़कर देहरादून आ गया तथा देहरादून में अलग-अलग जगहों पर काम करने लगा।
ट्रू कालर में बास नाम से सेव किया था अपना नंबर
आशीष ने बताया कि उसने अपने मोबाइल नंबर को ट्रू कालर पर बास नाम से सेव किया हुआ था। उसने विदेशी नागरिकों के करीब 5000 मोबाइल नंबर खरीदे थे, जिन्हें वह स्वयं व अपने साथियों के माध्यम से गूगल वाइस एप के माध्यम काल कर उनके फोन में खराबी होने तथा उसे ठीक करने के एवज में वह मोबाइल पर अवास्ट एंटीवायरस एप डाउनलोड करने की जानकारी देते थे। एप को उन्हें देने के एवज में उनसे 100 डालर कीमत का गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे। गिफ्ट कार्ड व पेमेंट मिलने के बाद वह केवल 10 प्रतिशत ग्राहकों को ही एंटीवायरस एप उपलब्ध कराते थे।
चाइनीज नागरिकों को बेच रहे थे गिफ्ट कार्ड
जांच में यह बात भी सामने आई है कि विदेशी नागरिकों से मिलने वाले गिफ्ट कार्ड को वह चाइनीज नागरिकों को बेच देते थे। गिफ्ट कार्ड के एवज में चाइनीज भी उनके खातों में पैसा डालते थे। काल सेंटर से वह अधिकतर अमेरिका व कनाडा के नागरिकों से ठगी करते हैं। काल सेंटर कुछ दिन चलाने के बाद वह पुलिस कार्रवाई के डर से बदल देते थे।




