अपराध

बिल्डर की गुंडागर्दी का डीएम ने लिया संज्ञान, गुंडा एक्ट में बुक, जिलाबदर की तैयारी

देहरादून: सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में विवादित बिल्डर पुनीत अग्रवाल की कथित दबंगई और आपराधिक गतिविधियों पर जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीएम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बिल्डर को गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है और सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर जिला बदर (एक्सटर्नमेंट) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आरोपी बिल्डर के खिलाफ पहले से ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं—115(2), 351(2), 352, 74, 126(2), 324(4) और 447—के तहत पांच मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों में मारपीट, उत्पीड़न, पिस्टल तानने, बच्चों से अभद्र भाषा में बात करने, वाहन से टक्कर मारने का प्रयास, धमकाने और स्थानीय निवासियों को झूठे मुकदमों में फंसाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, एक विधवा महिला की भूमि पर कथित रूप से कूटरचित रजिस्ट्री के जरिए कब्जा करने का मामला भी सामने आया है।

यह पहली बार नहीं है जब बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई हुई हो। इससे पहले दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने और लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग करने के मामले में डीएम सविन बंसल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उसका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था और हथियार जब्त कर लिया गया था। हाल ही में सामने आए एक मामले में, नगर निगम/एमडीडीए की भूमि पर कथित अवैध निर्माण का विरोध करने पर डीआरडीओ में तैनात वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा के साथ मारपीट का आरोप भी बिल्डर पर लगा है। शिकायत के अनुसार, निर्माण कार्य का मलबा वैज्ञानिक के घर की ओर गिर रहा था, जिसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और कथित रूप से मारपीट की गई, जिसमें वैज्ञानिक को चोटें आईं। पुलिस ने इस मामले में भी मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए सदस्यों का आरोप है कि बिल्डर आए दिन विवाद उत्पन्न करता है और विरोध करने वालों को धमकाने के साथ-साथ झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास करता है। कई शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में रोष था। डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि जनमानस—विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और असहाय वर्ग—की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन के इस कदम को क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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