राजनीति

बदरीनाथ चढ़ावा विवाद: प्रेस क्लब में हेमंत द्विवेदी का इंतजार करते रहे गणेश गोदियाल

देहरादून। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। मंगलवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल उत्तरांचल प्रेस क्लब पहुंचे और दावा किया कि उन्होंने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की सार्वजनिक बहस की चुनौती स्वीकार करते हुए यहां आने का निर्णय लिया। प्रेस वार्ता के दौरान उनके बगल में एक खाली कुर्सी रखी गई, जिस पर हेमंत द्विवेदी का नाम लिखा था। हालांकि, निर्धारित समय तक द्विवेदी के नहीं पहुंचने पर गोदियाल ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा।

गोदियाल ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से बीकेटीसी अध्यक्ष की सार्वजनिक बहस की चुनौती की जानकारी मिली थी। उन्होंने दावा किया कि सूचना मिलने के मात्र 56 मिनट के भीतर ही उन्होंने लाइव आकर चुनौती स्वीकार कर ली थी। उनका कहना था कि उत्तरांचल प्रेस क्लब सबसे तटस्थ मंच है, जहां दोनों पक्ष मीडिया के सामने तथ्य रख सकते थे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विवाद की शुरुआत बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान सामने आए एक वीडियो से हुई, जिसमें कथित तौर पर एक व्यक्ति धनराशि उठाते हुए दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले को सबसे पहले किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि एक सामाजिक संगठन ने उठाया था। ऐसे में मंदिर समिति को तत्काल निष्पक्ष जांच करानी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

गोदियाल ने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि जांच प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित जिम्मेदार लोगों को जांच पूरी होने तक पद से अलग किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस व्यक्ति का नाम इस प्रकरण में सामने आया है, वह बीकेटीसी अध्यक्ष का वैयक्तिक सहायक है और उसे चढ़ावे की गणना सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।
अपने कार्यकाल को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोदियाल ने कहा कि यदि उनके खिलाफ किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप हैं तो सरकार और बीकेटीसी अध्यक्ष उन्हें प्रमाण सहित सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि वह तथ्यों के आधार पर हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं। गोदियाल का आरोप है कि बदरीनाथ धाम के कथित चढ़ावा विवाद से ध्यान भटकाने के लिए उनके लगभग दस वर्ष पुराने कार्यकाल को मुद्दा बनाया जा रहा है।

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