अपराध

हरिद्वार में 54 करोड़ भूमि घोटाले में विजिलेंस का पांच शहरों में एक साथ आठ टीमों का छापा

हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित 54 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले में विजिलेंस ने जांच तेज करते हुए शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद विजिलेंस की आठ टीमों ने देहरादून, दिल्ली, लखनऊ, कनखल (हरिद्वार) और रुद्रप्रयाग में एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई घोटाले से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के आवासों व ठिकानों पर की जा रही है।

विजिलेंस की इस कार्रवाई से संबंधित विभागों और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि टीमों ने कई स्थानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अभिलेख अपने कब्जे में लिए हैं। इनकी गहन जांच के जरिए पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इस मामले के गुरुवार को विजिलेंस ने मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन विभिन्न शहरों में एक साथ छापेमारी कर जांच एजेंसी ने साफ संकेत दिया है कि मामले में तेजी से कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान जमीन खरीद की प्रक्रिया, बाजार मूल्य का आकलन, भुगतान की स्वीकृति, फाइलों के निस्तारण, बैंक खातों में हुए लेनदेन तथा संबंधित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भूमि खरीद प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी धन के दुरुपयोग में किस स्तर तक मिलीभगत हुई।

यह है पूरा मामला

यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा कथित रूप से बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर भूमि खरीदने और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। शुरुआती जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद राज्य सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। फिलहाल विजिलेंस की कार्रवाई जारी है। एक साथ पांच शहरों में की गई छापेमारी को जांच का अहम चरण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं और यदि साक्ष्य मिले तो मामले में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या संबंधित व्यक्तियों पर भी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। सरकार की ओर से भी स्पष्ट संकेत हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जांच निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ेगी।

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