
देहरादून: सरकारी मेडिकल कालेजों की MBBS की सीटों का सौदा कराने वाले गिरोह का विशेष जांच दल (एसआइटी) ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में एसआइटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह का नेटवर्क मेरठ से संचालित हो रहा था और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे की एक सीट का 45 लाख रुपये में सौदा किया जा रहा था। गिरोह ने तीन अभ्यर्थियों को दाखिला दिलाने के नाम पर 20-20 लाख रुपये एडवांस भी वसूल भी लिए थे।
एसआइटी ने गिरोह के दो सदस्यों रुपेश पंडित निवासी पूर्णिया, बिहार वर्तमान निवासी ब्रह्मपुरी, मेरठ उत्तर प्रदेश और अरविंद कुमार निवासी लक्सर हरिद्वार को गिरफ्तार किया है। रुपेश मेरठ में मिकोडो पाठशाला नाम से एजुकेशन कंसलटेंसी चला रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि तीन अभ्यर्थियों के नाम से उत्तराखंड में ‘अपुणी सरकार’ पोर्टल पर कूटरचित दस्तावेज लगाकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आनलाइन आवेदन किए गए। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए तो पूरे खेल की परतें खुलनी शुरू हुईं।
एसएसपी के अनुसार इसी मामले में रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में गठित एसआइटी ने जांच आगे बढ़ाई तो दाखिले के नाम पर चल रहे नेटवर्क की परतें खुली। इसके बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि अरविंद कुमार ने अपनी बेटी परी के एमबीबीएस दाखिले के लिए रुपेश से संपर्क किया था। इसके बाद उसने दो परिचितों के बच्चों का दाखिला कराने की जिम्मेदारी भी उसे दे दी। रुपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया। हर सीट के लिए 45 लाख रुपये तय हुए।
एसएसपी के अनुसार रुपेश पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसलटेंसी का काम कर रहा था। मिकोडो पाठशाला के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए और बीकाम आदि पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए कमीशन पर काम करता था। इसी नेटवर्क के जरिये सरकारी मेडिकल कालेजों में दाखिले का रास्ता निकालने की कोशिश की गई।




