अपराध

IPS बनने का सपना टूटा तो ठगी का रास्ता चुना; पूर्व मुख्य सचिव का बेटा गिरफ्तार

देहरादून। खुद को आईपीएस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले आरोपी आर. यशोवर्धन (35) को राजपुर थाना पुलिस ने मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस रामास्वामी का बेटा है। उसके कब्जे से फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड, पुलिस और आर्मी के लोगो, वर्दियां तथा वायरलेस सेट बरामद हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर होटल जिंजर में बुलाया और उनकी दिवंगत माता के नाम पर कंपनी का जल्द पंजीकरण कराने का झांसा देकर 15 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।

इसके बाद 15 जुलाई को कैनाल रोड स्थित सोशल स्टेज हॉस्टल में रहने वाली डॉ. अनुषा ने भी शिकायत दी कि यशोवर्धन ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड दिखाए तथा रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4.60 लाख रुपये हड़प लिए।

दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल के निर्देश पर राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट ने विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थलों और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तकनीकी साक्ष्य जुटाए और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। लगातार प्रयासों के बाद गुरुवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कई वर्षों तक यूपीएससी की तैयारी करता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर उसने खुद को फर्जी आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया। वह प्रभावशाली बातचीत, फर्जी पहचान पत्र, वर्दी और सरकारी रौब का इस्तेमाल कर नौकरी, टेंडर और अन्य सरकारी कार्य जल्द कराने का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम वसूलता था। पुलिस का दावा है कि वह वर्षों से कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

आरोपी के पास से 5 फर्जी आईडी कार्ड, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस और आर्मी के 25 लोगो, आर्मी/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां, 3 फर्जी रिबन और एक वायरलेस सेट बरामद किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने अब तक कितने लोगों को ठगा और उसके नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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