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‘आपरेशन पिंक प्रोजेक्ट’ के लिए उत्तराखंड की महिला IPS अधिकारी को मिला स्कॉच अवार्ड

देहरादून: महिला सुरक्षा के लिए चलाए गए ऑपरेशन पिंक प्रोजेक्ट के लिए उत्तराखंड की आइपीएस अधिकारी श्वेता चौबे को स्कोच अवार्ड से सम्मानित किया गया है। जनपद पौड़ी गढ़वाल में एसएसपी रहते हुए उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए अभिनव पहल की थी। बालिकाओं व महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की पिंक टीमें गठित की थी। शनिवार को 100वें SKOCH समिट में इस अभिनव पहल के लिए उन्हें प्रतिष्ठित SKOCH अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड, कानून प्रवर्तन में नवाचार करने के लिए व पुलिसिंग के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है। यह अवार्ड उन्हें SKOCH फाउंडेशन की ओर से दिया गया । प्रतिष्ठित SKOCH अवार्ड 2024 से सम्मानित होने पर उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।

तेज तर्रार आइपीएस अधिकारी श्वेता चौबे सेनानायक आइआरबी द्वितीय देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद पौडी गढवाल के कार्यकाल के दौरान कुशल नेतृत्व एवं उत्कृष्ट कार्य प्रणाली के तहत जनपद में बालिकाओं व महिलाओं की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए आपरेशन पिंक प्रोजेक्ट चलाया गया था। इसके तहत जनपद में वृहद स्तर पर प्रशिक्षण देकर महिला दारोगा व महिला कांस्टेबल को महिला सुरक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया। उसके उपरांत उन्हें जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में आपरेशन पिंक के अन्तर्गत पिंक यूनिट टीम का गठन कर तैनात किया गया।

पिंक यूनिट टीम का कार्य अपने थाना क्षेत्रों में पड़ने वाले स्कूल कालेज परिसर के बाहर मौजूद रहकर शांति एवं कानून व्यवस्था बनाने, मनचलों, शरारती, अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखने, छात्राओं को गुड टच बैड टच की जानकारी देने, साइबर सुरक्षा, पोक्सो एक्ट व इंटरनेट मीडिया में ट्विटर, इस्टाग्राम, फेसबुक का सुरक्षित उपयोग संबंधी जानकारी देना रहा। स्कूल-कालेज और नौकरीपेशा लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए पिंक यूनिट ने सुरक्षा कवच का काम किया। पिंक यूनिट टीमों ने उनके क्षेत्र में पड़ने वाले स्कूल व कालेज में जाकर स्कूल खुलने एवं छुट्टी के समय छात्राओं से वार्ता कर सुरक्षा की भावना जागृत करने का कार्य किया गया ताकि छात्राएं स्कूल आते जाते समय अपने आप को असुरक्षित महसूस न करे। यदि छात्राओं को स्कूल आते-जाते समय कोई समस्या होती, तो कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए उनकी बात सुनी जाती है और उसका समाधान किया जाता। इस अभिनव पहल के दायरे में 100 से ज्यादा स्कूल कालेज तथा 10,000 से ज्यादा बालिकाएं लाभान्वित हुई। महिला सुरक्षा के लिए उठाए गए इस सराहनीय कदम की देश भर में चर्चा एवं प्रशंसा हो रही है।

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