Dehradun : बुधवार को कार्य से विरत रहेंगे अधिवक्ता, टाइपिंग और स्टाम्प वेंडर, यह है मुख्य कारण

देहरादून: हाईकोर्ट शिफ्टिंग को लेकर मामला बढ़ता जा रहा है। जनमत जुटाने के लिए बार एसोसिएशन देहरादून ने अचानक 15 मई को कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन की ओर से इसको लेकर सुबह 11 बजे बैठक बुलाई है, जिसमें अग्रिम रणनीति तय की जाएगी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा व सचिव राजबीर बिष्ट ने सभी अधिवक्ताओं को बैठक में उपस्थित होने को कहा है।
दूसरी ओर चीफ जस्टिस ऋतु बाहरी और जस्टिस राकेश थपलियाल की खंडपीठ के हालिया आदेश के क्रम में हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के मामले में कोर्ट की वेबसाइट पर उस पोर्टल का लिंक डाल दिया है, जिसके माध्यम से अधिवक्ता व नागरिक अपनी हां या ना दर्ज कर सकते हैं। जो भी व्यक्ति हाई कोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट कराने के पक्ष में हैं, वह हां का विकल्प चुनेंगे, जबकि शिफ्टिंग न चाहने वाले व्यक्ति ना का विकल्प अपना सकते हैं। पोर्टल में विकल्प के चुनाव के लिए अधिवक्ताओं और नागरिकों के लिए पृथक-पृथक व्यवस्था की गई है। आगे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप नैनीताल हाईकोर्ट की वेबसाइट पर जाकर पोर्टल के लिंक के माध्यम से अपना मत दर्ज करा सकते हैं।https://highcourtofuttarakhand.gov.in/
चीफ जस्टिस ऋतु बाहरी और जस्टिस राकेश थपलियाल की बेंच के 08 मई 2024 के आदेश (उत्तराखंड राज्य बनाम गुलशन मनोट एवं अन्य) में हाई कोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट किए जाने की आवश्यकता को लेकर तमाम कारण गिनाए गए हैं। यह आदेश अपनेआप में यह बताता है कि हाई कोर्ट को नैनीताल जैसी जगह से क्यों शिफ्ट किया जाना चाहिए। इसी आदेश में हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के लिए हल्द्वानी के गोलापार की 26 हेक्टेयर भूमि के विकल्प को खारिज भी कर दिया गया है। क्योंकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह उस भूमि में शिफ्टिंग के पक्ष में नहीं है, जिसके 75 प्रतिशत भाग पर वन हैं।
हालांकि, पीठ ने हाई कोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करने की दिशा में सीधे कोई आदेश जारी करने जगह लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने का निर्णय किया है। जिसके एक पहलू में कोर्ट के महानिबंधक की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी है, जबकि दूसरे पहलू के रूप में अधिवक्ताओं व नागरिकों का मत जानने की व्यवस्था अपनाई जा रही है। हाई कोर्ट की वेबसाइट पर जारी किए लिंक की व्यवस्था इसी का हिस्सा है। शिफ्टिंग को लेकर मत दर्ज करने के लिए 31 मई 2024 तक का समय दिया गया है। इस अवधि को और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
इस प्रक्रिया के साथ-साथ कोर्ट ने मुख्य सचिव उत्तराखंड को हाई कोर्ट के लिए 50 वर्षों की जरूरत के हिसाब से भूमि का विकल्प तलाशने का आदेश भी दिया है। इसके लिए सरकार/शासन को 07 जून 2024 तक का समय दिया गया है। लिहाजा, हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के मामले में अधिवक्ताओं व जनता की राय बेहद मायने रखेगी। ऐसे में जितने अधिक व्यक्ति अपना मत दर्ज कराएंगे, कोर्ट को निर्णय करने में उतनी ही आसानी भी होगी। यह लिंक नैनीताल हाई कोर्ट के होम पेज पर ही आसानी से मिल जाएगा।
शिफ्टिंग को लेकर लिंक से पहले ही सहमति देने का आरोप
बार एसोसिएशन देहरादून ने हाई कोर्ट की शिफ्टिंग के मामले में कोर्ट की वेबसाइट पर डाले पोर्टल के लिंक पर पहले ही सहमति देने का आरोप लगाया है। बार एसोसिएशन के सचिव राजबीर बिष्ट ने बताया कि देहरादून, विकासनगर, ऋषिकेश व हरिद्वार में कुछ अधिवक्ताओं ने पोर्टल का लिंक खोलकर सहमति देने का प्रयास किया तो पता चला कि उस पर पहले ही सहमति दे दी गई है। आरोप है कि उनकी जगह किसी और ने ही सहमति दे दी है, ऐसे में उन्होंने रजिस्ट्रार जनरल हाई कोर्ट को मौखिक शिकायत दे दी है।




