देहरादून। राजधानी में पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक व्यक्ति की जान बच गई। समय रहते मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर फंदे पर लटके व्यक्ति को नीचे उतारा और सीपीआर देकर उसकी सांसें वापस लौटा दीं। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उपचार कर उसकी जान बचा ली।
जानकारी के अनुसार 06 मार्च 2026 को एक व्यक्ति चौकी बाईपास पहुंचा और पुलिस को सूचना दी कि उसके जीजा ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर फंदा लगा लिया है। उसने बताया कि कमरे की खिड़की से वह फंदे पर लटका हुआ दिखाई दे रहा है। सूचना मिलते ही चौकी बाईपास से चीता पुलिस के कर्मचारी तत्काल मौके के लिए रवाना हो गए।
पुलिस टीम जब मौके पर सचिवालय कॉलोनी के सामने कृष्णा विहार स्थित घर पहुंची तो वहां पहले से ही काफी संख्या में लोग एकत्रित थे। घर की खिड़की से एक व्यक्ति फंदे पर लटका हुआ दिखाई दे रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कर्मियों ने बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों ने कमरे का लोहे का दरवाजा अपने हाथों और लोहे की रॉड की मदद से तोड़ दिया। दरवाजा खुलते ही पुलिस ने तुरंत फंदे पर लटके व्यक्ति को नीचे उतारा। पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए मौके पर ही उसे सीपीआर दिया, जिससे कुछ ही देर में उसकी सांसें वापस लौट आईं।
इसके बाद पुलिसकर्मियों ने एम्बुलेंस का इंतजार किए बिना तुरंत निर्णय लेते हुए उस व्यक्ति को अपनी सरकारी मोटरसाइकिल पर बैठाकर नजदीकी कनिष्क अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया और समय रहते इलाज मिलने से उसकी जान बचाई जा सकी। पुलिस की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की सूझबूझ और मानवीय कार्यशैली की जमकर सराहना की।
इस रेस्क्यू अभियान में कांस्टेबल हितेश कुमार और कांस्टेबल बृजमोहन कनवासी की अहम भूमिका रही। उनकी तत्परता और समझदारी से एक व्यक्ति को नया जीवन मिल सका। पुलिस की इस मानवीय पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में पुलिस न केवल कानून व्यवस्था संभालती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोगों की जान बचाने के लिए भी हर संभव प्रयास करती है।

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