July 27, 2026

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लापरवाही: नंदा की चौकी का नया पुल धंसा, पहली ही बारिश नहीं झेल पाया 16 करोड़ से बना पुल

देहरादून। देहरादून-पांवटा साहिब के पुराने राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर हाल ही में तैयार किया गया मुख्य पुल पहली ही बड़ी बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्मित इस पुल में भारी धंसाव होने के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की चिंता बढ़ गई है।

यह वही पुल है, जिसे 12 जुलाई 2026 से यातायात के लिए खोला गया था। इससे एक दिन पहले, 11 जुलाई की रात टौंस नदी के तेज बहाव में ह्यूम पाइप डालकर बनाई गई अस्थायी पुलिया धंस गई थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने पुनर्निर्मित मुख्य पुल के अंतिम कार्य पूरे कर जल्दबाजी में यातायात शुरू कराया था। अब कुछ ही दिनों बाद पुल में धंसाव होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, 15 सितंबर 2025 की मध्यरात्रि को नंदा की चौकी का पुराना मुख्य पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल की एबटमेंट वॉल और एक स्लैब टूट जाने के कारण इसे असुरक्षित घोषित किया गया। इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी पुलिया बनाई गई, जिसने करीब 10 महीने तक इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात का भार संभाला।

मार्च 2026 में लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से नए मुख्य पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया। निर्माण पूरा होने के बाद 12 जुलाई से इस पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई थी। हालांकि पहली ही बड़ी बारिश में पुल के एक हिस्से में भारी धंसाव सामने आने से इसकी मजबूती और निर्माण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूचना मिलते ही प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुल का निरीक्षण किया। विभाग का कहना है कि धंसाव के कारणों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक मरम्मत और आगे की कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर यातायात को लेकर भी एहतियात बरती जा रही है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नया पुल पहली ही बड़ी बारिश का दबाव नहीं झेल सका। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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