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देश ने खोया शूटिंग का महान योद्धा, जसपाल राणा नहीं रहे

देहरादून। भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उत्तराखंड के टिहरी जिले के निवासी और देश के प्रसिद्ध निशानेबाज जसपाल राणा का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

बताया जा रहा है कि जसपाल राणा जर्मनी से भारत लौट रहे थे। उनके आकस्मिक निधन की सूचना मिलते ही खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और उनके प्रशंसकों में गहरा दुख व्याप्त हो गया। जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्होंने देश का नाम विश्व स्तर पर गौरवान्वित किया।
टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक स्थित भाल गांव में जन्मे जसपाल राणा को निशानेबाजी की शुरुआती ट्रेनिंग उनके पिता नारायण सिंह राणा ने दी थी, जो सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में अधिकारी रहे। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था। मात्र 12 वर्ष की आयु में अहमदाबाद में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में पदार्पण करते हुए उन्होंने रजत पदक जीतकर सबको चौंका दिया था।

वर्ष 1994 में 46वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप के जूनियर वर्ग में स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान मजबूत की। अपने लंबे और सफल करियर के दौरान जसपाल राणा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 600 से अधिक पदक अपने नाम किए। भारतीय खेलों में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2002 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

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