देहरादून: जिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक विवेचक ने लज्जा भंग करना (354) धारा की बढ़ोतरी की तो दूसरे विवेचक ने पत्रावली से सीसीटीवी फुटेज हटाकर अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्मण सिंह की कोर्ट में एफआर के विरुद्ध अपील की तो अब कोर्ट ने एसएसपी देहरादून को प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं।
एक महिला ने कोतवाली में अपने पड़ोसी के विरुद्ध शिकायतीपत्र दिया था। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपित उसे एक माह से जान से मारने की धमकी दे रहा है व कहता है अब तू कुछ दिन की मेहमान है। एक फरवरी 2022 को आरोपित जान से मारने व हाथ काटने की धमकी दी। इसके बाद 27 फरवरी को आरोपित ने उन्हें देखकर अश्लील हरकतें करने करने शुरू कर दिए। आरोपित यह शर्मनाक हरकत लगातार करने लगा और झूठे केस में फंसाने की धमकी देता है। इस मामले में शहर कोतवाली पुलिस ने तीन मार्च को आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद विवेचक मिथुन कुमार ने केस में धारा 354 की बढ़ोतरी की। धारा 354 महिलाओं से संबंधित होने के चलते विवेचना एसआइ हेमा बिष्ट व एसआइ नीमा ने की। कुछ समय बाद एसआइ नीमा ने केस में अंतिम रिपोर्ट लगा दी, जिसमें बताया कि आरोपित 80 वर्ष का बुजुर्ग है और शूगर का मरीज है। दोनों पक्षों का पुराना विवाद है। छेड़खानी, गाली गलौच जैसी घटना का विवेचना में कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ। कोर्ट में दाखिल पत्रावली में सीसीटीवी फुटेज का कोई साक्ष्य (इलेक्ट्रानिक) उपलब्ध नहीं थे।
महिला ने अंतिम रिपोर्ट पर आपत्ति जाहिर करते हुए सीजेएम कोर्ट में अपील की कि विवेचक ने वास्तविक तथ्यों के विपरीत जाकर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है। जबकि मामले में सीसीटीवी फुटेज व आरोपित की ओर से अपने सीसीटीवी कैमरे की दिशा पीड़ित के बेडरूम, गार्डन व बरामदे की तरफ किए जाने के फुटेज विवेचक को उपलब्ध कराए गए थे।
सीजेएम कोर्ट ने शहर कोतवाल को आदेश जारी किए हैं कि मामले की जांच कर इसकी आख्या कोर्ट में प्रस्तुत करें। एसएसपी को आदेश दिए हैं कि अब तक की विवेचना करने वाले विवेचकों की जांच करवाएं। इसके साथ ही प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में लिए गए सीसीटीवी फुटेज जिसके आधार पर धारा 354 की बढ़ोतरी की गई थी, में बिना न्यायोचित कारण विवेचना से क्यों हटाए गए वह साक्ष्य कहां हैं? इसकी जांच कर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए न्यायालय को सूचित किया जाए।

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