July 13, 2026

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कोटद्वार के गबर ने बढ़ाया सुरंग में फंसे श्रमिकों का हौसला तो सुरक्षित बच निकले सभी लोग, 25 वर्षों से सुरंगों में काम करते आए हैं गब्बर

उत्तरकाशी: वह फोरमैन गबर सिंह नेगी और सबाह अहमद ही थे, जिन्होंने स्वयं सुरंग में कैद होने के बावजूद 17 दिन तक साथी श्रमिकों का हौसला नहीं टूटने दिया। दोनों उन्हें समझाते रहे कि किसी भी स्थिति में हमें हिम्मत नहीं हारनी है। भरोसा रखिए, इस कैद से हम जल्द आजाद होंगे। पौड़ी जिले के कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत विशनपुर निवासी गबर सिंह जहां पिछले 25 वर्षों से सुरंग निर्माण कंपनियों से जुड़े हैं, वहीं भोजपुर (बिहार) निवासी सबाह अहमद को भी सुरंगों में काम करने का लंबा अनुभव है। गबर सिंह तो कुछ वर्ष पूर्व इसी तरह निर्माण के दौरान सुरंग में फंस चुके हैं। 12 नवंबर को जब सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन हुआ तो गबर सिंह व सबाह अहमद समेत 41 श्रमिक अंदर ही फंस गए। घटना की सूचना के बाद गबर सिंह का बेटा आकाश नेगी, बड़े भाई जयमल सिंह व तीरथ सिंह नेगी समेत परिवार के अन्य सदस्य उत्तरकाशी पहुंचे। इस दौरान आकाश ने पिता गबर सिंह से पाइप के जरिये बात की। तब गबर सिंह ने आकाश को बताया कि वह सुरंग में अकेले नहीं हैं। उनके साथ जो श्रमिक साथी हैं, उन सबकी सुरक्षा का जिम्मा भी उन्हीं का है। इसलिए वह श्रमिक साथियों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों से भी उनकी बात हो रही है। सो, घबराने की कोई जरूरत नहीं। जैसे ही बाहर निकलने का रास्ता बनेगा, सभी साथियों के सकुशल निकलने के बाद वह स्वयं बाहर आएंगे। इन सत्रह दिनों तक बड़े भाई जयमल नेगी भी गबर सिंह से पाइप के जरिये नियमित बात करते रहे। जयमल ने बताया, जब भी वह गबर सिंह से बात करते थे, स्पष्ट प्रतीत होता था कि उन्हें साथी श्रमिकों के जीवन की खुद से ज्यादा चिंता है। इसलिए वह कैद की अवधि में साथी श्रमिकों को सुरंग के अंदर नियमित रूप से टहलने और योगाभ्यास करने के लिए प्रेरित करते रहे। गबर सिंह व सबाह अहमद नवयुग कंपनी में फोरमैन के पद पर तैनात हैं। सबाह भी इन 17 दिनों में साथियों का मनोबल बनाए रखने को उन्हें जहां चोर-पुलिस का खेल खिलाते रहे, वहीं किस्से-कहानियों से भी उनका मन बहलाने की कोशिश करते रहे। श्रमिकों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए तैनात डा. प्रेम पोखरियाल कहते हैं, गबर सिंह जैसी सूझबूझ हो तो कठिन से कठिन चुनौती से भी आसानी से पार पाया जा सकता है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी साथियों का हौसला नहीं टूटने दिया।

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