देहरादून: जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन) के घटते राजस्व को लेकर जिलाधिकारी एवं चिकित्सा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. आशीष चौहान ने गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने अस्पताल की आय में लगातार आ रही कमी के कारणों की विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पिछले वर्षों के बजट, विभिन्न मदों में हुए खर्च और प्रस्तावित बजट व्यय का वर्षवार विश्लेषण भी तैयार करने को कहा है, ताकि वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।
शुक्रवार को आयोजित जिला चिकित्सालय चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक में अस्पताल की वित्तीय स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए और हर खर्च का औचित्य स्पष्ट होना आवश्यक है।
बैठक में जिलाधिकारी ने लावारिस एवं निराश्रित मरीजों के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपचार पूरा होने के बाद ऐसे मरीजों को अस्पताल परिसर में छोड़ने के बजाय रेन बसेरा या अन्य उपयुक्त आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था की जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में अस्पताल से जुड़े कुल 38 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें पुरानी सीवर और ड्रेनेज लाइन की मरम्मत, ऑक्सीजन पोर्ट एवं एयर प्वाइंट का प्रतिस्थापन, आईसीयू और रिकवरी वार्ड की ऑक्सीजन प्रणाली का उन्नयन, मरीजों के लिए गाउन, गद्दे एवं अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद, सिरिंज पम्प, मोटराइज्ड बेड, ईसीजी मशीन, पैथोलॉजी उपकरण, गायनी एवं ऑर्थोपेडिक विभाग के आधुनिक चिकित्सा उपकरण, सीसीटीवी कैमरे, एयर कंडीशनर, कंप्यूटर और प्रिंटर की खरीद जैसे प्रस्ताव शामिल रहे।
इसके अलावा अस्पताल परिसर के सौंदर्यीकरण, भवनों की मरम्मत, शौचालयों के नवीनीकरण, स्वच्छता व्यवस्था, विद्युत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा आवश्यक दवाओं एवं सर्जिकल सामग्री की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित वित्तीय नियमों, गुणवत्ता मानकों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किए जाएं। उन्होंने प्रत्येक परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग पर भी जोर देते हुए कहा कि जिला चिकित्सालय आमजन से सीधे जुड़ा संस्थान है, इसलिए यहां मरीजों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यतेन्द्र सिंह, मुख्य कोषाधिकारी नीतू भंडारी, डॉ. जेपी नौटियाल, सांसद प्रतिनिधि विनोद खंडूरी, मेयर प्रतिनिधि आशीष नागरथ तथा समाजसेवी राकेश अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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