हरिद्वार। देशभर में चर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उसका शव हरिद्वार स्थित चाय के खोखे में रस्सी के सहारे फंदे पर लटका मिला। सूचना पर सप्त ऋषि पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पुलिस ने अल्मोड़ा निवासी उसके स्वजन को घटना की जानकारी दे दी है। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए हर पहलू की जांच कर रही है।
शहर कोतवाली पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान ग्राम मंगरुखाल, भिकियासैंण, अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई। शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और भूपतवाला क्षेत्र में किराये पर चाय का खोखा लेकर काम कर रहा था। रविवार को उसका शव दुकान के अंदर फंदे पर लटका मिला। आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि उसका व्यवहार सामान्य था और उसने कभी किसी तरह की परेशानी का जिक्र नहीं किया था।
पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि सुरेंद्र ने करीब दो महीने पहले भूपतवाला में चाय का खोखा किराये पर लिया था। खोखा मालिक राजीव ने पुलिस को बताया कि सुरेंद्र ने अपना नाम और अल्मोड़ा का पता बताया था। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसका किराएदार देश के चर्चित निठारी कांड का आरोपित रह चुका है। आत्महत्या के बाद जब सुरेंद्र की पहचान और निठारी कांड से उसका संबंध सामने आया तो खोखा मालिक समेत आसपास के लोग भी हैरान रह गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि हरिद्वार आने से पहले सुरेंद्र ने सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में चाय की ठेली लगाकर काम करने की कोशिश की थी। वहां कारोबार नहीं चला तो वह देहरादून चला गया और कुछ समय वहां काम किया। करीब दो महीने पहले वह फिर हरिद्वार लौट आया और भूपतवाला में चाय का खोखा लेकर रहने लगा। सिडकुल में ठेली लगाने के दौरान उसने रोशनाबाद क्षेत्र में किराये पर कमरा भी लिया था। आसपास के लोगों के मुताबिक वह बीच-बीच में रोशनाबाद आता-जाता था।
सुरेंद्र कोली का नाम दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी कांड के बाद देशभर में सुर्खियों में आया था। नोएडा के निठारी गांव में पंधेर की कोठी के पास नाले से लापता बच्चों के कंकाल और अवशेष बरामद होने के बाद मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। व्यवसायी मनिंदर सिंह पंधेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली पर बच्चों के अपहरण और हत्या समेत गंभीर आरोप लगे थे। मामले के बाद आरोपियों को फांसी देने की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए थे।
निचली अदालतों ने सुरेंद्र कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में मामलों की जांच और साक्ष्यों को लेकर सवाल उठे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में कोली और पंधेर को कई मामलों में बरी किया था। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कोली को उसके बचे हुए अंतिम मामलों में बरी कर दिया था। अदालत ने जांच में गंभीर कमियों और ठोस वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों के अभाव को महत्वपूर्ण माना था।
परिवार में मां के बाद नहीं बचा था कोई सहारा
पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि सुरेंद्र की मां की कुछ समय पहले मौत हो चुकी थी। परिवार में उसके लिए कोई खास सहारा नहीं बचा था। निठारी मामले से जुड़े लंबे विवाद और सामाजिक दूरी के बीच वह अपने मूल गांव से दूर रहकर अलग-अलग जगहों पर काम कर जीवन गुजार रहा था। हालांकि आत्महत्या के पीछे यही वजह थी या कोई अन्य कारण, पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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