देहरादून: राजधानी में आई आपदा गहरे जख्म देकर चली गई। कई लोग हमेशा के लिए अपनों बिछुड़ गए, कईयों की तलाश की जा रही है, जबकि कई लोगों के आशियानें उजड़ गए। राजधानी में प्रशासनिक अमला आपदा के दिन से जुट गया था, लेकिन आपदा से त्रस्त दुरुस्त गांवों तक राहत कम पहुंच पाई। यहां हेलीकॉप्टर से राशन व अन्य सामग्री पहुंचाई जा रही है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी सविन बंसल ढाई घंटे में 16 किमी पैदल पगडंडियों को नापकर अमले संग आपदाग्रस्त क्षेत्र फुलेद गांव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आपदाग्रस्त लोगों की समस्याएं सुनीं और तहसीलदार, बीडीओ एवं अन्य विभागों के अधिकारियों को आपदाग्रस्त क्षेत्र के लिए अग्रिम आदेश तक किए तैनात कर दिए।

तहसीलदार, ब्लाक प्रभारी कृषि, एडीओ उद्यान व जेई लोनिवि अंतिम व्यक्ति को मुआवजा वितरण तक मौके पर ही तैनात रहेंगे। आपदा के कारण देहरादून से करीब 40 किलोमीटर दूर फुलेत, छमरोली, सिल्ला, सरोना, सिमयारी, क्यारा आदि में भारी क्षति हुई है। जगह-जगह सड़कें टूटने के कारण वहां राहत सामग्री पहुंचानी भी मुश्किल है।
डीएम देहरादून ने हेली सेवा का विकल्प छोड़ पैदल रास्ता चुना ताकि रास्ते में क्षति का आकलन करते हुए तत्काल प्रभाव से राहत कार्य शुरू किया जा सके। पैदल रूट नाप डीएम आपदा से हुई क्षति का जायजा लिया और जनमानस की समस्याएं सुनते हुए अधिकारियों को जनजीवन सामान्य बनाने के निर्देश दिए।

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